Tuesday, August 20, 2019
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Charaiveti - Charaiveti

चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना

चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना, चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना, नहीं रुकना, नहीं थकना, सतत चलना - सतत चलना, यही तो मंत्र है अपना, शुभंकर मंत्र है अपना ॥ध्रु॥ हमारी प्रेरणा भास्कर है, जिनका रथ सतत चलता । युगों से कार्यरत है जो, सनातन है प्रबल ऊर्जा । गति मेरा धरम है जो, भ्रमण

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Swayam Ab Jaagkar Humko Jagana Desh He Apna

स्वयं अब जागकर हमको, जगाना देश है अपना

स्वयं अब जागकर हमको, जगाना देश है अपना जगाना देश है अपना, जगाना देश है अपना ॥ध्रु.॥ हमारे देश की मिट्टी, हमें प्राणों से प्यारी है, यहीं के अन्न जल वायु, परम श्रद्धा हमारी है, स्वभाषा है हमें प्यारी, ओ प्यारा देश है अपना ॥1॥ जगाना देश है अपना, जगाना देश है अपना, स्वयं अब जागकर

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Bharat of Future - An RSS Perspective

Bharat of Future – An RSS Perspective (Day 3)

20-09-2018   परमपूज्य डॉ.मोहनराव भागवत-   समापन सत्र - श्री मोहन भागवत जी   बस तीन-चार छोटी बातें कहनी हैं। क्योंकि कल दो भाषण मैं पहले ही दे चुका और प्रश्नों के उत्तर भी दे चुका हूं। पहली बात है संघ के बारे में कौन, क्या कहता है इस पर विश्वास मत रखिए। अब चाहते तो

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Bharat of Future - An RSS Perspective

Bharat of Future – An RSS Perspective (Day 2)

18-09-2018 परमपूज्य डॉ.मोहनराव भागवत- मंच पर उपस्थित माननीय संघचालकगण। उपस्थित सभी महानुभावों, माताओं, बहनों। कल हमने देखा कि किस प्रकार और किस कार्य के लिए संघ की स्थापना हुई। और उसकी कार्यपद्धति कैसी है। व्यक्ति निर्माण का कार्य है, व्यक्ति निर्मित होने के बाद समाज में वातावरण बनाते हैं। समाज के आचरण

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Bharat of Future - An RSS Perspective

Bharat of Future – An RSS Perspective (Day 1)

परमपूज्य डॉ.मोहनराव भागवत- मंचस्थ माननीय संघचालक वर्ग, उपस्थित सभी महानुभाव माताओं, बहिनों। संघ को समझने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन हुआ है क्योंकि संघ अब एक शक्ति के रूप में इस देश में उपस्थित है। ऐसा अनुभव सारी दुनिया को होता है। स्वाभाविक उसकी चर्चा चलती है। चलनी भी चाहिए। परंतु

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Swayamsewak's Life

Swayamsewak’s Wife

संघ कार्यकर्ताओं की धर्मपत्नीयों को समर्पित एक कविता मेरे माता - पिता के मन में सखी, जाने क्या थी बात समाई देखा उन्होंने मेरे लिए जो, एक "स्वयंसेवक" जमाई। क्या कहुँ बहन मुझे न जाने, क्या - क्या सहन करना होता है? "इनके" घर आने - जाने का, कोई निश्चित समय न होता

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Nij Gaurav Ko Nij Vaibhav Ko Kyon Hindu Bahadur Bhool Gaye

Nij Gaurav Ko Nij Vaibhav Ko Kyon Hindu Bahadur Bhool Gaye

निज गौरव को निज वैभव को क्यों हिंदू बहादुर भूल गये उपदेश दिया जो गीता में क्यों सुनना सुनाना भूल गये निज गौरव को निज वैभव को क्यों हिंदू बहादुर भूल गये (1) रावण ने सिया चुराई थी हनुमत ने लंका जलाई थी अब लाखों सीता हरी गयी क्यों लंका जलना

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Madhav Sadashiv Golwalkar

Shat Naman Madhav Charan Mein

शत नमन माधव चरण में, शत नमन माधव चरण में॥ शत नमन माधव चरण में, शत नमन माधव चरण में॥ आप की पीयुष वाणी शब्द को भी धन्य करती, आप की आत्मियता थी युगल नयनो से बरसती, और वह निश्चल हँसी जो गूँज उठती थी गगन में ॥ शत नमन माधव चरण में, शत नमन माधव

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Hum Sabhi Ka Janm Tab Pratibimb Sa Ban Jaye

Hum Sabhi Ka Janm Tab Pratibimb Sa Ban Jaye

हम सभी का जन्म तव प्रतिबिम्ब सा बन जाय॥ और अधुरी साधना चिर पूर्ण बस हो जाय। बाल्य जीवन से लगाकर अन्त तक की दिव्य झाँकि मूक आजीवन तपस्या जा सके किस भाँति आँकी क्षीर सिंधु अथाह विधि से भी न नापा जाय चाह है उस सिंधु की हम बूँद ही बन जायँ ॥१॥ हम सभी

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