Wednesday, October 16, 2019
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Neelaambuj Shyaamal Komalaangam

Shri Ram Vandana

नीलाम्बुजश्यामलकोमलाङ्गं, सीतासमारोपितवामभागम। पाणौ महासायकचारूचापं, नमामि रामं रघुवंशनाथम ॥३॥ Neelaambuj Shyaamal Komalaangam, Sita Samaro Pitvaam Bhaagam, Paanau Mahaasaayak Chaaru chaapam, Namaami Raamam Raghuvansh Naatham ॥३॥ (गोस्वामी तुलसीदासकृत रामचरितमानस, अयोध्याकाण्ड, श्लोक ३) हिंदी शब्दार्थ नील कमल के सामान श्यामल, सुन्दर, सांवले और कोमल अंग वाले, जिन के बाई ओर सीता माता विराजमान हो कर के इस

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Kartik Swami Temple

कार्तिक स्वामी मंदिर

कार्तिक स्वामी रुद्रप्रयाग जिले के पवित्र पर्यटक स्थलों में से एक है। रुद्रप्रयाग शहर से 38 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस स्थान पर भगवान शिव के पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित मंदिर है। समुद्रतल से 3048 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह स्थान शक्तिशाली हिमालय की श्रेणियों से घिरा हुआ

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Bhartiya Navvarsh 2075

भारतीय नववर्ष – 2075

#भारतीय_नववर्ष_की_विशेषता ग्रंथो में लिखा है कि जिस दिन सृष्टि का चक्र प्रथम बार विधाता ने प्रवर्तित किया, उस दिन चैत्र शुदी १ रविवार था। हमारे लिए आने वाला संवत्सर २०७५ बहुत ही भाग्यशाली होगा, क्योंकि इस वर्ष भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रविवार है। शुदी एवम शुक्ल पक्ष एक ही है। चैत्र के

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Types of God in Hindu Religion

33crore (330 million) or 33 types of God in Hindu Dharm

हिंदू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उड़ाई गयी की हिन्दूओं के 33 करोड़ देवी देवता हैं या यह कहें कि स्वमं हिंदुओं को भी हिंदू धर्म एवं वेदों का ज्ञान न होने के कारण यह दुष्प्रचार हुआ। इसी कारण मुर्ख हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे

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Swami Avdheshanand Giri Maharaj

The ideology of Hindutva can bring peace in the world today

हिन्दुत्व माने मानव धर्म। जीव मात्र का धर्म। हिन्दुत्व या सनातन धर्म की बात करते हैं तो हमारा औदार्य सामने आता है:- 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का। 'आत्मवत् सर्वभूतेषु' का। सबको अपने जैसा देखो, चूंकि आप कुटुम्ब में हैं। पूरा विश्व ही एक कुटुम्ब माना गया है-अग्नि, अंबर, जल, वायु, निहारिकाएं, नक्षत्र, जलचर, थलचर,

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Shri Ram Stuti

श्री राम स्तुति

श्री रामचंद्र कृपालु भज मन हरण भवभय दारुणम् । नव कंजलोचन कंजमुख करकंज पदकंजारुणम् ।। व्याख्या- हे मन! कृपालु श्रीरामचंद्रजी का भजन कर। वे संसार के जन्म-मरण रूप दारुण भय को दूर करने वाले है। उनके नेत्र नव-विकसित कमल के समान है। मुख-हाथ और चरण भी लालकमल के सदृश हैं। कंदर्प अगणित अमित छवि

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Bhojan Mantra

Bhojan Mantra

  अन्न ग्रहण करने से पहले विचार मन मे करना है किस हेतु से इस शरीर का रक्षण पोषण करना है हे परमेश्वर एक प्रार्थना नित्य तुम्हारे चरणो में लग जाये तन मन धन मेरा विश्व धर्म की सेवा में ॥ ब्रहमार्पणं ब्रहमहविर्‌ब्रहमाग्नौ ब्रहमणा हुतम् । ब्रहमैव तेन गन्तव्यं ब्रहमकर्मसमाधिना ॥ ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्विनावधीतमस्तु । मा

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