Wednesday, October 16, 2019
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राष्ट्र सेविका समिति

Rastra Sevika Samiti

नारी ही स्वयं प्रकृति है, सृष्टी की आद्य शक्ति है। इस संपूर्ण चराचर जगत् में जहाँ भी जो कुछ दिखाई देता है, वह उसी आद्याशक्ति की प्रभा से आभासित है, अत: चैतन्यमय है। इस आद्याशक्ति को हम महालक्ष्मी, महासरस्वती, महाकाली और उस परब्रह्म की शक्ति के रुप में मानते है। प्रत्येक स्त्री उस शक्तितत्त्व का अंश है इस संकल्पना से प्रेरणा लेकर भारतिय संस्कृति प्रवाहीत हुई।

भारतिय समाज रचना का ताना बाना ब्रह्ममयी चैतन्य शक्ति के अंशरूप नारी अस्तित्त्व से चारो तरफ बुना हुआ दिखाई देता है। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने समाज धारणा के लिए नारी की सुप्त शक्तियोंको आधार रूप माना है। हम देखते है की प्रत्येक कार्य में शक्ति आंतरनिहीत होती है। उस शक्ति का जागरण करते हुए, शक्ति को संघटित करते हुए, उसे राष्ट्र निर्माण कार्य में लगाने का विलक्षण ध्येय अधुनिक ऋषिका वं. मौसीजी ने अपने सामने रखा और उस उद्देश की पूर्ति हेतू राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना की।

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