Wednesday, April 1, 2020
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Bharat of Future – An RSS Perspective (Day 3)

Bharat of Future - An RSS Perspective
20-09-2018
 
परमपूज्य डॉ.मोहनराव भागवत-
 
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समापन सत्र – श्री मोहन भागवत जी
 
बस तीन-चार छोटी बातें कहनी हैं। क्योंकि कल दो भाषण मैं पहले ही दे चुका और प्रश्नों के उत्तर भी दे चुका हूं। पहली बात है संघ के बारे में कौन, क्या कहता है इस पर विश्वास मत रखिए। अब चाहते तो मैंने जो बोला उस पर भी विश्वास मत रखिए। आप आप संघ को अंदर से देखिए। और फिर संघ के बारे में अपना जो मत बनाना है वो बनाइए। मैं ये नहीं कहता कि आप कन्वेंस होइए, कन्वेंस होने के लिए मैंने कुछ कहा नहीं। वो आपका करना है, लेकिन संघ को पहले निकट से देखिए, समझ लीजिए। और फिर आपको जो कहना है कहिए, आपको जो करना है वो आप कीजिए।
 
ये जो उपक्रम हमारा चला उसमें कन्वेंस करने की बात नहीं थी, हम फेक्ट्स बताना चाहते हैं और जो फेक्ट्स है वही मैंने बताए हैं। अब इसके बाद अगर आप में से किसी की इच्छा हुई कि संघ के कार्य में प्रत्यक्ष जुड़ेंगे। शाखा में जाइए, नहीं शाखा में जाना नहीं होगा मेरा। तो ठीक है। संघ के स्वयंसेवक अनेक अच्छे काम करते हैं, उसमें जुड़िये। समाज परिवर्तन के काम करते हैं। सब प्रकार के क्षेत्रों में काम करते हैं उसमें आप जुड़ सकते हैं।
 
नहीं लेकिन यहां संघ के स्वयंसेवकों से मिलकर मैंने एक अच्छा काम चलाया, वही मैं करना चाहता हूं, जरूर कीजिए। नहीं मैं किसी से जुड़ना नहीं चाहता, मैं अपना काम करूंगा, जरूर कीजिए। बस हमारी एक ही अपेक्षा है, आप निष्क्रिय मत रहिए, इसके बाद। जैसे भी आपको समझ में आता है। इस राष्ट्र को अपने स्वत्व पर खड़ा करने के लिए और परम वैभव सम्पन्न बनाने के लिए इस राष्ट्र को समझकर सारे देश को एक करने की दिशा में जो भी छोटा-बड़ा काम आप अपने पद्धति से करना चाहते हैं, वो कीजिए। जहां संघ वहां उनकी जितनी ताकत है वो उतना आपको सहायता वो जरूर करेंगे। केवल आपको सम्पर्क रखना पड़ेगा। कई लोगों को लगता है कि मुझे कहने से हो जाएगा। संघ में उल्टा है, ऊपर से काम नहीं होता है, जमीन पर जो है, उनके साथ आप सम्पर्क रखो, आपको पेढ़ी भी ऊपर आने की जरूरत नहीं पड़ेगा। वहीं परस्पर सब हो जायेगा। तो आप स्थानीय तौर पर सम्पर्क रखें। आपको सहायता होगी, और हमको भी आपसे कोई सहायता चाहिए तो मांगने के लिए हमारा परिचय रहेगा। हमारी जितनी शक्ति है हम करेंगे, आपकी जितनी शक्ति है आप करो। लेकिन इस देश को हमको खड़ा करना है। क्योंकि सम्पूर्ण दुनियां को आज एक तीसरा रास्ता चाहिए। और दुनिया जानती है, हम भी जानें कि तीसरा रास्ता देने की अंतरनिहित शक्ति केवल और केवल भारत की है। ये भारत हित का काम है क्योंकि हम भारत में हैं और भारत के नागरिक है, ये मेरे आपके व्यक्तिगत और पारिवारिक हित का भी काम है। और ये दुनियां के कल्याण का काम है। इसको नहीं करेंगे तो तीनों पर खतरा है, हम जागें, भारत का यह कर्तव्य है। भारत ने जब-जब दुनियां में पदार्पण किया किसी को जीतने के लिए नहीं किया सबके हृदय जीते और सब जगह जो था उससे अच्छा किया। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ अपने गीत में कहते हैं ए हमार देश जेदिन तोमाय बोइभो मोय भाण्डार ओबेझी कोई विश्व जनाए शकोल कामना पूरण करे शिव महादीनरे महाइतिहास नित्य वर्ण जुवर्ण करि। हे महान देश हे हमारे महान देश जिस दिन तुम अकूत ज्ञान भण्डार और सम्पत्ति भण्डार सारे विश्व के लिए खुला हो गया और उन सकल लोगों की कामना पूर्ण करने लगा उस महादिन का स्मरण करो, उसको अपने जीवन में वरण करो। ये आवाह्न साक्षात अपने सामने खड़ा है, उसको पूरा करने की ताकत हमको समाज की बनानी पड़ेगी। और इसके लिए समाज को जोड़ने वाला एकमात्र सूत्र जो है उसका आलम्बन ले कर सम्पूर्ण समाज को इससे जोड़ना पड़ेगा। अपने कर्तव्यबोध पर खड़ा करना पड़ेगा। और उनके गुणवत्ता को बढ़ाकर उनके सामूहिक प्रयास को आगे बढ़ाना पड़ेगा। ये अत्यंत पवित्र कार्य है। सारे दुनिया के जीवन में एक अर्थ और समृद्धि उत्पन्न करने वाला ये काम है। ये हम सबको करना है, करना ही है क्योंकि हम भारत माता के पुत्र कहलाते हैं, हम भारत देश के नागरिक कहलाते हैं। भारत का अस्तित्व ही इस प्रयोजन के कारण उत्पन्न हुआ है। आप कल्पना करो ये सत्य मिलने के बाद, हमारे उस समय के पूर्वजों ने कितना परिश्रम किया होगा। गांव-गांव में, झोपड़ी-झोपड़ी तक ये अपने देश का स्वभाव इस स्तर तक पहुंचा है। घुमंतु जमात की बात निकली, ये घुमंतु लोग कौन हैं जिन लोगों स्वेच्छा से अपने जीवन का ये संदेश सबके जीवन में उतारने के लिए घर, गांव छोड़ दिया। एक जगह रहना अस्वीकार करके, घुमंतु जीवन स्वीकार करके प्रचार वो गांव-गांव करने वाले लोग हैं। जमाना बदल गया, उनके शास्त्र हमारे ध्यान में नहीं आते लेकिन एक जमात है जो कसरत करती है और डोंबारी कहते हैं उनको। वो फिजिकल कल्चर का समाज में प्रचार करने वाले लोग थे। जड़ी बूटी को जानने वाले लोग थे। धातु कला उस समय प्रकर्ष उस समय धातु युग था। तो धातु का काम सिखाने वाले, सीखने वाले लोग थे। ऐसे कई प्रकार है उनमें और आज भी वो लोग जाते है ये काम करने के लिए तो घर में परम्परागत विचार करके जाते हैं। ये क्यों, ये छोड़ दो आज के जमाने में नहीं चलेगा, ऐसा कहना है तो बहुत बार उत्तर मिलता है ये हमारा धर्म है। इतना परिश्रम करना ये देश बना है दुनियां के लिए। उसका ईश्वर प्रदीप्त कर्तव्य पूर्ण करने के लायक उसको होना चाहिए। इसलिए ये बात हम करते हैं। आपको ये सब बताने के पीछे संघ के बारे में गलतफहमियां ठीक हों ये तो है ही, लेकिन अकेला संघ बड़ा हो गया तो कौन-सी बड़ी बात है। इतिहास में हम ये लिखा देना नहीं चाहते कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कारण देश का उद्धार हुआ। हम ये लिखा देना चाहते हैं कि इस देश में एक ऐसी पीढ़ी निर्माण हुई, उन्होंने उद्यम किया और अपने देश को पूरी दुनियां का गुरु बनाया। उस पवित्र कर्तव्य के प्रारम्भ के लिए मैं आपका आवाह्न करता हूं। और इन दो दिनों में आपने बहुत धेर्य से सुना लम्बा-लम्बा भाषण। मैंने प्रश्नों के उत्तर दिये वो आपने सुने उसमें कुछ चूक भूल रही हो तो आप सबसे क्षमा मांगता हुआ कर्तव्य का हम बोध जागृत करें। सारे समाज में इस एक बात को कहता हुआ और मेरा निवेदन समाप्त करता हूं बहुत-बहुत धन्यवाद।
 
Content Source: http://rss.org//Encyc/2018/9/20/Bharat-of-Future-An-RSS-Perspective-Day-3.html
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