Wednesday, January 29, 2020
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राष्ट्र निर्माण में हमारी भूमिका

Rashtra Nirman Mein Hamari Bhumika

रोहतास नगर जिला YPE विचार गोष्ठी
रविवार, 17.11.2019

स्वयं अब जागकर हमको … जगाना देश है अपना
YPE जिला टोली सदस्य प्रमोद जी द्वारा इस सुंदर गीत से कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ एवं दिव्यांश जी (YPE जिला टोली सदस्य) ने YPE – Young Professionals and Executives के विषय में बताते हुए गोष्ठी की भूमिका रखी।

दिव्यकान्त जी (जिला रोहतास नगर YPE प्रमुख) ने आगे का विषय रखा।

राष्ट्र माने क्या?
भूमि, जन, संस्कृति से बनता है राष्ट्र।
राष्ट्र एक संस्कृतिवाचक शब्द है, राष्ट्र एक सांस्कृतिक इकाई है।
Nation is not just a piece of land

राष्ट्र निर्माण की संकल्पना?
जब एक राष्ट्र में सामाजिक एकता, राजनीतिक स्थिरता एवं आर्थिक समृद्धि हो, प्रत्येक नागरिक का योगदान राष्ट्र निर्माण में हो तभी यह सार्थक होगा।

राष्ट्र निर्माण में किसकी भूमिका?
सामान्य नागरिक व सरकार। सरकार की भूमिका हमारा कल का विषय नहीं था, हमें चिंतन करना था कि राष्ट्र निर्माण में हमारी क्या भूमिका हो व हो सकती है?

हम = स्वयंसेवक/युवा विशेषतः YPE

राष्ट्र के प्रति एक सही रवैये की आवश्यक्ता है। एक Positive Attitude, Constructive Approach, Sense of Responsibility and Ownership चाहिए।

अपने राष्ट्र के प्रति एक Sense of Pride भी हमें सदैव अपने मन में रखना चाहिए। अपनी प्राचीन संस्कृति एवं अपने गौरवशाली इतिहास को पुनः वर्तमान में पहले जैसा बनाना है, ऐसा हमारा संकल्प होना चाहिए।

इतना गौरवशाली इतिहास होते हुए भी, आज समाज पश्चिम देशों की तरफ क्यूँ देखता है?
क्योंकि, आज Success का Parameter Development है और अमेरिका जैसे राष्ट्र आर्थिक रूप से Developed हैं। हालाँकि उसमे योगदान भारतियों का अधिक है।

परन्तु ईश्वर ने उस राष्ट्र को प्रारंभिक समय पर सब कुछ नहीं दिया था। यह निर्माण वहाँ के लोगों ने मिलकर, एक साथ चलकर, राष्ट्र के प्रति सही रवैया रखकर, उसका निर्माण किया है।
We were always taught about the attacks, invasions, slavery and all that which could demotivate us.

परन्तु, सही चीज़ पढ़कर और समाज को सच्चाई बताना हमारा कर्तव्य है।

प्रत्येक राष्ट्र की एक USP होती है (Unique Selling Proposition)
US – Liberty
UK – Queen’s pride
Middle East – Oil/Fuel

भारत की USP क्या है?
Spirituality and Culture.
कोई भी राष्ट्र अपनी संस्कृति को भुलाकर निर्मित नहीं हुआ। युवा वर्ग में बहुत ऊर्जा है, रचनात्मक्ता है, इसे सही दिशा देने की आवश्यकता है।

This needs to be channelized, बिना दिशा, शिक्षा, संस्कृति का युवा, किसी भी राष्ट्र के पतन का कारण भी हो सकता है।

स्वामी विवेकानंद के मन में भी यही भाव था – यह मेरा राष्ट्र है, यह मेरी प्राथमिकता है, मैं ही इसका निर्माण करूँगा और इसी भाव को लेकर अनेक महापुरुष आगे बढे। हमें भी यही भाव रखते हुए कार्य करना है।

युवा निर्माण के तीन तत्व – शिक्षा, रोजगार, शशक्तिकरण।
परन्तु राष्ट्र निर्माण व युवा निर्माण से पूर्व स्वयं के निर्माण की आवश्यक्ता है।

हमारा स्वयं का निर्माण क्यूँ आवश्यक है?
उत्तर – संघ का कार्यकर्ता एक लालटेन के शीशे के समान है। आंधी आने पर (विषम परिस्थितियों में) जलती लालटेन को बुझने से बचाना। परन्तु, यदि शीशे पर धूल जम गई तो प्रकाश प्रदान कर अंधकार नहीं मिटा पायेगा।

हम क्या उपक्रम कर सकते हैं?
1. Skill Development
2. Moral Education
3. Health Awareness
4. Environment – Pollution, Plastic Ban
5. Legal Awareness

हम ही क्यूँ? कार्यकर्ता ही समाज की चिंता क्यूँ करे?
स्वर्गीय दत्तोपंत ठेंगडी जी (संघ प्रचारक, भाष्यकार) ने कहा था ‘The best should suffer so that the rest can prosper’

We want the youth of this nation to become an asset not a liability.
We want contributors in society not competitors.

हमारा लक्ष्य बड़ा है, इसमें मार्ग विरोधक आएँगे, भटकाव होगा, लालच सामने आएगा। परन्तु हमें निस्वार्थ भाव से आगे बढ़ते रहना है। सबको संगठित करते हुए राष्ट्र निर्माण का कार्य करना है।

हमें Many Dimensional Vision रखकर भी Single Point Concentration रखना है। Singleness of Purpose समझना है।

परम् पूजनीय गुरुजी ने कहा है – Short cuts will cut you short.
Short cut हमारे संकल्प को ही काट देता है।

सभी को संगठित करते हुए हमें आगे बढ़ना। इतिहास से प्रेरणा लेते हुए, परन्तु इतिहास की बातों में खोकर सोना नहीं।

लहर आकर चली जाती है, हमें Impactful and Visible Change पर ध्यान देना है।

आगे चलकर हमें सम्पूर्ण विश्व को धर्म संस्कार देना है, हिन्दू राष्ट्र और सनातन धर्म अभेद्य है।

अंत में, श्रीमान सुबोध जी (विभाग YPE प्रमुख) ने विषय समाप्त करते हुए सभी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से पूरी निष्ठा एवं सम्पूर्ण भाव से जुड़ने का आह्वान किया। संघ की कार्य पद्यति कैसे हमें समाज के प्रति दायित्ववान बनाती है यह उन्होंने बताया।

अहम मिटाकर वयम में विश्वास रखने वाले हम सभी जो आज एकत्र हुए हैं, मन में एक संकल्प लेकर जाएं और अपनी ऊर्जा को हम सभी एक दिशा में लगाएँ।

🌸 ।। भारत माता की जय ।। 🌸
🚩 ।। वन्देमातरम ।। 🚩

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