Monday, August 19, 2019
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Shri Dinesh Chandra Ji (Organizing Secretary General – VHP)

Shri Dinesh Chandra VHP

दिनाँक 10-06-2016, सायं 5:30 बजे सेवाधाम, मंडोली, दिल्ली में स्थित विद्या मंदिर में 21-06-2017 से चल रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शिक्षा वर्ग (प्रथम वर्ष) के समापन समारोह में जाने अवसर मिला।

शिक्षा वर्ग में शिक्षा ले रहे सभी स्वमसेवकों के परिवार एवं इष्ठ-मित्र तथा समाज के सभी लोगों को निमंत्रण था।

समारोह में
अध्यक्ष : प्रो. आर. के. काले (जवाहरलाल नेहरू विश्वविधालय)
उद्धबोधन : मा. दिनेश चंद्र जी (अंतर्राष्टीय संगठन महामंत्री, विश्व हिन्दू परिषद)
वर्गाधिकारी : सुशील गुप्ता
प्रांतसंघचालक: कुलभूषण अहूजा

समारोह की व्यवस्था देखते ही बनती थी।
समारोह का स्थान ढूंढने में किसी को भी समस्या न हो उसके लिये उचित प्रबंध किए गए थे। लगभग दो किलोमीटर पहले ही हर थोड़ी – थोड़ी दूरी पे स्वमसेवक रास्ता बताने के लिए खड़े मिले एवं ॐ के चिन्ह के छोटे-छोटे ध्वज हमें समारोह स्थान तक ले जाने में सहयोग कर रहे थे।

पार्किंग की भी उचित व्यवस्था थी। विद्यामंदिर के मुख्य द्वार पर कई स्वमसेवक आने वाले सभी अतिथियों के स्वागत के लिये खड़े थे।

उनमें से एक वरिष्ठ स्वमसेवक श्री जगदीश प्रसाद जी से मैं पहले से परिचित था तथा उन्हें इस बात की बहुत प्रसन्ता हुई कि में परिवार सहित समारोह देखने के लिये आया हूँ।

जैसे ही हमने विद्यामंदिर में प्रवेश किया तो वहाँ का वातावरण देखकर में थोड़ा सा भावुक हो गया। प्रवेश करते ही माताएँ बहने आने वाले सभी अतिथियों को चंदन का तिलक लगा कर उनका स्वागत कर रहीं थीं तथा थोड़ी ही दूरी पर भारत माता का चित्र था, सभी लोग भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पण करके जलपान के लिए जा रहे थे एवं जलपान के बाद समारोह स्थल पर।

समारोह में ध्वजारोहण के बाद स्वमसेवकों ने कई शारीरिक कार्यक्रम किये। स्वमसेवकों का शारीरिक देख सभी अतिथि अचंभित थे कि सामान्य से दिखने वाले बालक इतने कठिन कार्य कर रहे हैं।

इसके बाद समारोह के अध्यक्ष श्री काले जी ने अपने अनुभव साझा किए।

अब मा. दिनेश जी का बौद्धिक आरम्भ हुआ और लगभग आधा घंटे के बौद्धिक में उन्होंने मैदान में बैठे सभी लोगों को मानो जैसे मंत्रमुग्ध कर दिया हो। मैं एक क्षण भी अपना ध्यान उनके बौद्धिक से हटा नहीं पा रहा था।

मा. दिनेश जी के बौद्धिक का एक छोटा सा अंश:
आज जो कुछ भी भारतवर्ष हमको दिखाई देता है वह ऐसा नहीं रहा।
कभी भारतवर्ष सोने की चिड़िया था अर्थात वैभवसम्पन्न था तथा ज्ञान-विज्ञान में आगे था।
यहाँ के जो विश्वगुरु के नाते से दुनिया ने इस भारत मे हिन्दू समाज को स्वीकार किया था।
दरवंतो विश्वार्यम यानी सम्पूर्ण विश्व को हम आर्य बनाएंगे यानी श्रेष्ठ बनाएंगे , गुणवान, श्रेष्ठ …

मा. दिनेश जी का पूरा बौद्धिक सुनने के लिए नीचे नीले बॉक्स में प्ले के बटन पर क्लिक करें

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