Saturday, December 14, 2019
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Lotus Under My Burka

Lotus Under My Burka

दरवाजे पे साँकल खड़खड़ाने लगी खड़$$.. खड़$$.. खड़$$..

दरवाजे पे पड़ रही साँकल की चोट से सीलन भरी दीवारों से कच्चे हरे रंग की पपड़ी झड़ने लगी और कील पर टँगा उर्दू का काबा बना कैलेंडर भी थरथराने लगा।

लकड़ी की रेक पे सलीके से रखे एल्युमिनियम के बर्तन काँपने लगे, अब दरवाजे पे साँकल के साथ पान भरे मुँह से आवाज निकली रेहाना-ऐ-रेहाना.. भी आई और गजब हो गया जब कर्कश आवाज, साँकल की खड़खड़ के साथ दरवाजे पे घूँसे बाजी भी होने लगी।

सिलबट्टे पे मसाला पिसती रेहाना हाथ दुपट्टे से पोंछ के दरवाजा खोलने भागी और इतने में बकरी से टकराते और मुर्गी को पैर से बचा कर बकरी की लेंड़ियों पे पैर रख दौड़कर अंदर से साँकल खोलने लगी कि बाहर से लगे दबाव से उसकी ऊँगली अंदर की साँकल में आ गयी।

उसने जोर से दरवाजा बाहर की और भड़िक कर आखिकार दरवाजा खोल दिया।

लेकिन ऊँगली की चोट से बिलबिला कर बोली कि आफत आ गयी है क्या, आसमान टूट पड़ा है, सुबु ही कहा था ठीक से हग के जाओ, पर माने नहीं, अब पिरेसर बना तो आसमान सर पे लिए भागे आ रहे हो।

और उसने अपनी चोटखाई ऊँगली मुँह में जीभ के ऊपर रख ली फिर निकाली और हाथ को जुम्बिश देकर फिर से मुँह में रखी।

जुम्मन इतने में फुर्ती से कोने में रखे सींक के मूढे पर बैठ कर धँसा हुआ लंबी-लंबी साँसे ले रहा था।

रेहाना.. पानी पिला.. रेहाना पानी लेकर आई, जुम्मन ने मुहँ से पान की पिसी हुई गिलोरी पास में रखे तसले में थूकी और एक साँस में पानी गटक गया, फिर गले के गमछे से पसीना पोंछ कर बोला रेहाना अल्लाह का कहर टूट गया पूरी की पूरी कौम ही काफिरी में तब्दील हो गयी, लगता है साले खबीस गद्दार हैं।
रेहाना को सब कुछ समझ आ गया था। वो अपनी खुशी को बनावटी चिंता में लपेट कर बोली क्या हुआ? आज तो काउंटिंग थी! असलम भाई नहीं जीते क्या ?

अरे तू जीत छोड़, पूरे सूबे के लगभग सबरे ही हार गए हैं। कमल वाले जीत गए हैं। हमारी सीट पे हमारी कौम के वोट ज्यादा होने पर भी कमल वाले जीत गए हैं।

अब दरवाजा भड़ाक से फिर खुलता है, अब्बू..अब्बू.. हाती वाली भेन जी के रई थी के मुए अमेत साऐ ने मसीनों में दखलन्दाजी करी है।

अमजद आ चुका था। ये खबर उसी ने सुनाई थी। या अल्लाह यकीन नहीं होता, इंतिखाब तो संजीदगी से हुए थे। अकलेस भाईजान ने सारे बंदोबस्त चाक-चोबन्द किए थे।

दरवाजा फिर से खुलता है, अब रईस , मूमु, आरिफ, कल्लू , रऊफ, दानिश, साजिद भी आ गए थे।

जुम्मन मियाँ के निकाह तो चार हुए थे पर पेहले वालियों ने कोई बच्चा नहीं जना सो तलाकएसुन्ना से तुराह के बाद पीछा छुड़ाया, बाद वालियों में तीसरी का इंतकाल हो गया था। चौथी रेहाना थी, जिससे 8 लड़के और एक लड़की शबनम थी। जिसका निकाह उसके मौसेरे भाई सईद से हुआ था। जो तुनक मिजाज था और आये दिन तलाक की धमकी दिये रहता था। इसलिए एतिहातन कुछ दिनों से शबनम मायके में ही थी।

पास में रखे पान सुपारी के डिब्बे से आरिफ सरोते से सुपारी काट कर अब्बू के पान पर रख चुका था। अब्बू अब सामान्य होकर भी पेशानी पे लकीरे ला के सबको समझा रहे थे देखो अब कमल वाले जीत गए हैं, उनकी सरकारे बनेगी, तुम लोग सबर करना, बिलावजह मत उलझना, अब आजम भाई भैंसों को ढूँढने लायक भी नहीं बचे हैं।

अबी होली आ रही है, बर्दाश्त न हो तो घर में रहना, फ़सादी दोनों तरफ हैं।

इतने में शबनम आ गयी, बोली अम्मी खाना लगा रई हैं। चिकन बिरयानी का थाल लेकर रेहाना आ चुकी थी।

जुम्मन ने आँखे तरेर कर कहा.. सूबे में हमारे तरफदार हार गए हैं और… और तुम दावती खाना बना बैठी।

रेहाना ने पानी का टोंटी वाला जग रखते हुए जवाब दिया, सुबु-सुबु तुम नये कुर्ते पजामे में इतर लगा के चले थे, तो हम ने सोचा कि जश्न होगा ही, कुछ खास बना लें। अब हमें भी कोन सा पता था, ये खबर आएगी।

जुम्मन सहमत था। बाप बेटे थाल के चारों और बैठकर एक ही थाल से बिरयानी खाने में मशगूल हो गए। उधर.रसोई में रेहाना ने शबनम को बाहों में भरकर कहा मेरी बच्ची अल्लाह तआला ने हमारी सुन ली, अब तुझे तलाक देने के पहले उसे 10 बार सोचना पड़ेगा। अब तलाक उल बिद्दत पे रोक लग ही जायेगी। उधर आड़ में जाकर शबनम ने बुर्के के अंदर जेब से कमल चुनाव चिन्ह का बिल्ला निकाल कर चुम लिया। या अल्लाह.. तेरी मेहरबानी।

गली में बीजेपी के उम्मीदवार के विजयी जुलुस के नगाड़े बज चुके थे और भारत माता की जय के नारे में रेहाना और शबनम भी मन ही मन “जय” के नारे दोहरा रही थी।

भारत माता की जय, भारत माता की जय।

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