Wednesday, October 16, 2019
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Change The Calendar not Your Culture

Chaitra Shukla Pratipada

कलेंडर बदलिए अपनी संस्कृति नही।

अपनी संस्कृति की झलक को अवश्य पढ़ें और साझा करें।

1 जनवरी आने से पहले ही सब नववर्ष की बधाई देने लगते हैं। मानो कितना बड़ा पर्व हो। नया केवल एक दिन ही नही, कुछ दिन तो नई अनुभूति होनी ही चाहिए।

1 जनवरी को क्या नया हो रहा है …???

न कक्षा बदली… न सत्र

न फसल बदली…न खेती

न पेड़ पौधों की रंगत

न सूर्य चाँद सितारों की दिशा

ना ही नक्षत्र

आखिर हमारा देश त्योहारों का देश है। ईस्वी संवत का नया साल 1 जनवरी को और भारतीय नववर्ष (विक्रमी संवत) चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है।

  1. आईये देखते हैं दोनों का तुलनात्मक अंतर:

  2. प्रकृति
    English कलेंडर भारतीय कलेंडर
    एक जनवरी को कोई अंतर नही जैसा दिसम्बर वैसी जनवरी वही चैत्र मास में चारो तरफ फूल खिल जाते हैं, पेड़ो पर नए पत्ते आ जाते हैं। चारो तरफ हरियाली मानो प्रकृति
    नया साल मना रही हो
    मौसम, वस्त्र
    English कलेंडर भारतीय कलेंडर
    दिसम्बर और जनवरी में वही वस्त्र, कंबल, रजाई, ठिठुरते हाथ पैर चैत्र मास में सर्दी जा रही होती है, गर्मी का आगमन होने जा रहा होता है
    विद्यालयो का नया सत्र
    English कलेंडर भारतीय कलेंडर
    दिसंबर जनवरी मे वही कक्षा कुछ नया नहीं.. जबकि मार्च अप्रैल में स्कूलो का रिजल्ट आता है नई कक्षा नया सत्र यानि विद्यालयों में नया साल
    नया वित्तीय वर्ष
    English कलेंडर भारतीय कलेंडर
    दिसम्बर-जनबरी में कोई खातो की क्लोजिंग नही होती.. जबकि 31 मार्च को बैंको की (audit) क्लोजिंग होती है नए बही खाते खोले जाते है। सरकार का भी नया सत्र शुरू
    होता है।
    कलैण्डर
    English कलेंडर भारतीय कलेंडर
    जनवरी में नया कलैण्डर आता है.. चैत्र में नया पंचांग आता है। उसी से सभी भारतीय पर्व, विवाह और अन्य महूर्त देखे जाते हैं। इसके बिना हिन्दू समाज जीवन की कल्पना
    भी नही कर सकता इतना महत्वपूर्ण है ये कैलेंडर यानि पंचांग।
    किसानो का नया साल
    English कलेंडर भारतीय कलेंडर
    दिसंबर-जनवरी में खेतो में वही फसल होती है.. जबकि मार्च-अप्रैल में फसल कटती है नया अनाज घर में आता है तो किसानो का नया वर्ष और उत्साह।
    पर्व मनाने की विधि
    English कलेंडर भारतीय कलेंडर
    31 दिसम्बर की रात नए साल के स्वागत के लिए लोग जमकर शराब पीते है, हंगामा करते है, रात को पीकर गाड़ी चलने से दुर्घटना की सम्भावना,
    रेप जैसी वारदात, पुलिस प्रशासन बेहाल और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का विनाश..
    जबकि भारतीय नववर्ष व्रत से शुरू होता है पहला नवरात्र होता है घर घर मे माता रानी की पूजा होती है। शुद्ध सात्विक वातावरण बनता
    है।
    English कलेंडर भारतीय कलेंडर
    1 जनवरी का कोई ऐतिहासिक महत्व नही है.. जबकि चैत्र प्रतिपदा के दिन महाराज विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत् की शुरुआत, भगवान झूलेलाल का जन्म, नवरात्रे प्रारंम्भ,
    ब्रम्हा जी द्वारा सृष्टि की रचना इत्यादि का संबंध इस दिन से है I

एक जनवरी को अंग्रेजी कलेंडर की तारीख और अंग्रेज मानसिकता के लोगो के अलावा कुछ नही बदला..

अपना नव संवत् ही नया साल है। जब ब्रह्माण्ड से लेकर सूर्य चाँद की दिशा, मौसम, फसल, कक्षा, नक्षत्र, पौधों की नई पत्तिया, किसान की नई फसल, विद्यार्थीयों की नई कक्षा, मनुष्य में नया रक्त संचरण आदि परिवर्तन होते है। जो विज्ञान आधारित है।

अपनी मानसिकता को बदले, विज्ञान आधारित भारतीय काल गणना को पहचाने। स्वयं सोचे की क्यों मनाये हम 1 जनवरी को नया वर्ष..???

“एक जनवरी को कैलेंडर बदलें.. अपनी संस्कृति नहीं”

आओ जागेँ जगायेँ, भारतीय संस्कृति अपनायेँ और आगे बढ़े।

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