Wednesday, October 16, 2019
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Valley of the traitors

Valley of the traitors

घाटी मे कोलाहल है, कोलाहल है गद्दारों का…
मौसम बना हुआ है देखो आतंकी त्यौहारों का ।

मौत हुई है आतंकी की लाखों चेहरे रोए हैं…
हम तो केवल दाल टमाटर के भावों मे खोए हैं ।

आतंकी का एक जनाजा मानो कोई जलसा है…
लाखों लोग उमड़ आए हैं जैसे कोई फरिश्ता है ।

सेना पे पथराव किया है अफ़जल के दामादों ने…
फिर से थाने फूँक दिए हैं धरती के जल्लादों ने ।

सीधा मतलब साथ निभाने वाले भी आतंकी है…
इन सबकी वजह से पूरी घाटी ही आतंकित है ।

दूध पिलाना बंद करो अब आस्तीन के साँपों को…
चौराहों पे गोली मारो साठ साल के पापों को ।

सौ सौ बार नमन् सेना को डटी रही है घाटी मे…
आतंकी को मिला रही है काट काट के माटी मे ।

सेना को अब आतंको की छाती पे चढ़ जाने दो…
साथ निभाने वालों पे भी अब गोली बरसाने दो ।

एक बार अब श्वेत बर्फ पे लाल रंग चढ़ जाने दो…
लाश बिछा दो गद्दारों की सेना को बढ़ जाने दो ।

एक परीक्षण नये बमों का गद्दारों पे कर डालो…
दहशतगर्दों के सीने मे तुम भी दहशत भर डालो ।

भूलो गिनती गद्दारों की लाश बिछाना शुरू करो…
वंदे मातरम् भारत माँ की जय तराने शुरू करो ।

देशप्रेमियों की सैनिकों पूरी मन्नत कर डालो…
नर्क भेज के गद्दारों को भूमि जन्नत कर डालो।

Shared By: Mr. Shekhar Upreti (WhatsApp User)

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